महोबा। दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में अधिवक्ताओं और दिल्ली पुलिस के बीच हुई मारपीट की घटना को लेकर बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के आह्वान पर जिलेभर के अधिवक्ता हड़ताल पर रहे। अधिवक्ताओं की हड़ताल के चलते सोमवार को न्यायिक कामकाज नहीं हो सके। दूर-दराज से आए वादकारियों के मुकदमों की पैरवी न हो पाने के कारण वह बैरंग लौट गए।

गौरतलब है कि दो दिन पहले दिल्ली कोर्ट में अधिवक्ताओं और पुलिस के बीच किसी बात को लेकर विवाद होने के बाद मारपीट शुरू हो गई। इस घटना के विरोध में बार एसोसिएशन महोबा के अध्यक्ष राजकिशोर तिवारी के नेतृत्व में महोबा के वकीलों ने हड़ताल कर न्यायिक कामकाज ठप कर दिया। वकीलों के न्यायिक कार्य से विरत रहने के कारण अदालतों में कोई कामकाज नहीं हो सका।
कुलपहाड़ प्रतिनिधि के अनुसार बार एसोसिएशन कुलपहाड़ के अध्यक्ष मोहम्मद शाकिर खान की अध्यक्षता में अधिवक्ताओं की बैठक हुई। दिल्ली में अधिवक्ताओं पर पुलिस द्वारा की गई लाठीचार्ज और फायरिंग के विरोध में अधिवक्ता सोमवार को न्यायिक कार्य से विरत रहे। जिससे न्यायालय परिसर में सन्नाटा पसरा रहा। बाद में अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी मोहम्मद उवैस को सौंपा। ज्ञापन में दोषी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। ज्ञापन देने वालों में प्रमोद मिश्रा, लक्ष्मण सिंह यादव, केदारनाथ सक्सेना, कौशलेंद्र राठौर, अशोक सक्सेना, सुरेंद्र सिंह, देवी राजा, जमुना प्रसाद, मनमोहन नामदेव, कृष्ण गोपाल सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे। चरखारी प्रतिनिधि के अनुसार दिल्ली में अधिवक्ताओं और पुलिस के बीच हुए विवाद में पुलिस द्वारा बर्बरता पूर्ण कार्रवाई के विरोध में सोमवार को वकील कार्य से विरत रहे और पुलिस के खिलाफ विरोध जताया। इस मौके पर महेंद्र यादव, मुशीर अहमद, केके सक्सेना, कुलदीप, सोमित श्रीवास्तव, अरविंद सिंह, वीरपाल सहित अधिवक्ता उपस्थित रहे।