अधिवक्ता समिति के बारे में

बात सन 1962 की है तब महोबा एक सब डिवीज़न हुआ करता था जिसमे चरखारी , महोबा, कुलपहाड़ , तहसीले उसके क्षेत्र अधिकार में आती थी स्मरणीय है की अधिवक्ता अधिनियम भी 1961 में पारित होकर लागू हुआ था तब महोबा में एस. डी. एम्. व जे. एम्. कोर्ट ही थी उस समय श्री जी. पी. मिश्रा जी न्यायिक अधिकारी थे

उनकी प्रेरणा से महोबा बार एशोसिएशन का गठन हुआ था जिसमे परम आदरणीय श्री देवकी नंदन सुल्लेरे जी को अध्यक्ष व् श्री केशव दत्त तिवारी को सचिव एवं कोषाध्यक्ष बनाया गया था

इस जोड़ी ने लम्बी पारी खेली और 1964 में बार एशोसिएशन का हॉल बनकर तैयार हुआ जिसका उद्घाटन श्री महावीर शरण दस IAS आयुक्त झाँसी मंडल, झाँसी के कर कमलो से सम्पन्न हुआ था उस समय परगनाधिकारी (SDM) ओम प्रकाश गोयल जी एवं जे. एम्. बलराज ओबराय थे एवं जिला अधिकारी डी. पी. वरुण जी थे

तत्पश्चात श्री बृजगोपाल सक्ससेना अध्यक्ष रहे सन 1990 से 1995 तक श्री बाबू रघुपति सिंह अध्यक्ष व श्री चन्द्र दत्त सुल्लेरे जी सचिव पद पर रहे सन 1995 के पश्चात् चुनाव सम्पन्न हुआ सर्व सम्मति न होने के कारण यहां का बार दो भागो में विभक्त हो गया जो सीनियर बार एशोसिएशन व जूनियर बार एशोसिएशन में विभक्त हो गया, तब सीनियर बार एशोसिएशन का नेतृत्व श्री राम रतन दीक्षित जी ने किया तथा जूनियर बार का नेतृत्व एस. एस. गुप्ता ने किया इसी दौरान माननीय उच्च न्यायालय के प्रशाशनिक जज का भृमण कार्यक्रम हुआ दो अध्यक्षों की मुलाकात पर उन्होंने झोम व्यक्त करते हुए दोनों बारो का एकीकरण कर दिया कालान्तर में जिला अधिवक्ता समिति का पंजीकरण हुआ और क्रमशः निर्वाचन संपन्न होने लगे

बार कॉउंसिल ऑफ़ इंडिया के निर्देशों के अनुपालन में निर्वाचन का कार्य एल्डर कमेटी की देख रेख में सम्पन्न होने लगा